Friday, June 20, 2008
पैसा बोले आपकी भाषा
इकनॉमिक टाईम्स का विज्ञापन है - पैसा बोले आपकी भाषा ! लेकिन आम आदमी के पास तो पैसा ही नहीं है । वह कौन सी भाषा बोलेगा और सुनेगा ।
Thursday, June 12, 2008
आरुषि
क्या हो गया है मीडिया को । दिल्ली मे रोज दो - चार कत्ल होते हैं , लेकिन उन घटनायों का सिर्फ़ जिक्र कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है। लेकिन आरुषि हत्याकांड मे यह कुछ ज्यादा ही रूचि ले रहा है। इसका कारण स्पष्ट है कि उसे इस घटना के रिपोर्टिंग मे कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा है। क्योंकि इसमे उसे अन्य घटना की तुलना मे कुछ ज्यादा मिर्च - मशाला लगाने को मिल रहा है। यह सही है कि टीआरपी की होड़ में शामिल होने के लिए सभी चैनलो के द्वारा कुछ भी किया जा रहा है। लेकिन चैनल इस दौरान समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भूल रहे हैं। यह मीडिया के लिए उचित नही.
Thursday, February 21, 2008
वाह मीडिया
आज मीडिया अपने संक्रमण के दौर से गुजर रहा है- उस पर बाज़ार पूरी तरह हावी है- मीडिया चैनलों का खबर आज बाज़ार निर्धारित कर रहा है- क्योंकि पूरे मीडिया का कंटेंट विज्ञापन एजेंसियां तय करने लगी है- यह सभी जानते हें कि विज्ञापन एजेंसियां और अद्द्योगिक घरानों मे नाभिनाल संबंध है- यही कारण है कि उनके लिए खबरों की तुलना मे विज्ञापन महत्वपूर्ण हो गया है- यहाँ तक कि कई बार अच्छी और गंभीर खबर को यह कह कर दबा दिया जाता है कि अमिताभ बच्चन को ठंड लग गयी है- और यह सबसे अच्छी खबर है- वाह मीडिया ! तेरा जवाब नहीं-
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